हरियाणा में किसानों पर 60 करोड़ से अधिक फसल कर्ज, जींद-हिसार-सिरसा समेत कई जिलों में संकट गहराया

कर्ज़ के बोझ तले दबा किसान, खेती संकट में

हरियाणा प्रदेश, जिसे देश की अन्न भंडार की संज्ञा दी जाती है, आज गंभीर कृषि संकट से गुजर रहा है। प्रदेश के किसानों पर 60 करोड़ रुपये से अधिक का फसल कर्ज हो चुका है। मौसम की मार, फसलों का सही दाम न मिलना, बढ़ती लागत और बैंक व आढ़तियों से लिया गया कर्ज—इन सबने मिलकर किसान को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है।


खेती की लागत बढ़ी, आमदनी घटी

बीते कुछ वर्षों में खेती की लागत लगातार बढ़ती गई है।
बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, बिजली और मजदूरी—हर चीज़ के दाम आसमान छू रहे हैं। वहीं दूसरी ओर किसानों को उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) समय पर नहीं मिल पाता।

प्रमुख कारण

  • खाद और बीज के दाम में भारी बढ़ोतरी
  • डीजल और बिजली महंगी
  • मजदूरों की कमी
  • प्राकृतिक आपदाएं (सूखा, ओलावृष्टि, अतिवृष्टि)
  • मंडियों में फसल का सही मूल्य न मिलना

60 करोड़ से ज्यादा फसल कर्ज कैसे बढ़ा?

हरियाणा में किसान हर सीजन फसल उगाने के लिए बैंक, सहकारी समितियों और आढ़तियों से कर्ज लेते हैं। जब फसल खराब हो जाती है या दाम कम मिलते हैं, तो किसान कर्ज चुकाने में असमर्थ हो जाता है।

कर्ज का चक्र

  1. किसान फसल के लिए कर्ज लेता है
  2. मौसम खराब → फसल नुकसान
  3. मंडी में कम भाव
  4. कर्ज चुकाने में असमर्थ
  5. अगली फसल के लिए फिर कर्ज

यही चक्र किसानों को कर्ज़दार बनाता जा रहा है।


सबसे ज्यादा प्रभावित जिले कौन-कौन से हैं?

हरियाणा के कई जिले इस कर्ज संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन कुछ जिलों में हालात ज्यादा गंभीर हैं।

🟢 प्रभावित जिले (अनुमानित स्थिति)

H3: जींद जिला

  • धान और गेहूं की खेती प्रमुख
  • पानी की कमी और बिजली संकट
  • हजारों किसान सहकारी बैंकों के कर्जदार

H3: हिसार

  • कपास और गेहूं की खेती
  • कपास में कीट रोग से भारी नुकसान
  • आढ़तियों से लिया गया कर्ज बढ़ा

H3: सिरसा

  • कपास बेल्ट क्षेत्र
  • गुलाबी सुंडी से फसल तबाह
  • करोड़ों का फसल कर्ज

H3: फतेहाबाद

  • बारिश और सूखे दोनों की मार
  • किसान लगातार कर्ज ले रहे हैं

H3: भिवानी

  • कम सिंचाई सुविधा
  • बाजरा और सरसों की खेती
  • बैंक लोन बकाया

H3: रोहतक

  • छोटे और सीमांत किसान ज्यादा
  • आय कम, खर्च ज्यादा

H3: करनाल

  • धान की खेती में पानी संकट
  • बिजली कटौती से नुकसान

छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा परेशान

हरियाणा में 70% से ज्यादा किसान छोटे और सीमांत हैं। इनके पास 1 से 2 एकड़ जमीन होती है। कम जमीन में खेती कर परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।

H5: छोटे किसानों की समस्याएं

  • बैंकों से पूरा कर्ज नहीं मिलता
  • मजबूरी में आढ़तियों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज
  • सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं

सरकार की योजनाएं, लेकिन ज़मीनी हकीकत अलग

सरकार ने किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, जैसे:

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)
  • ब्याज सब्सिडी
  • प्राकृतिक आपदा मुआवजा

लेकिन समस्याएं:

  • बीमा क्लेम समय पर नहीं
  • मुआवजा बहुत कम
  • कागजी प्रक्रिया जटिल
  • छोटे किसान छूट जाते हैं

किसानों की मांगें

कर्ज संकट से जूझ रहे किसानों ने सरकार से कई मांगें रखी हैं।

H3: प्रमुख मांगें

  • फसल कर्ज माफ किया जाए
  • MSP की कानूनी गारंटी
  • बीमा क्लेम तुरंत मिले
  • खाद-बीज सस्ते किए जाएं
  • बिजली और पानी की व्यवस्था

सामाजिक असर: आत्महत्या और पलायन का खतरा

कर्ज का दबाव सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि मानसिक तनाव भी पैदा कर रहा है। कई किसान खेती छोड़कर मजदूरी या शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।

H5: गंभीर परिणाम

  • किसान परिवारों में तनाव
  • बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
  • खेती से भरोसा उठता जा रहा

निष्कर्ष: अगर समाधान नहीं हुआ तो संकट गहराएगा

हरियाणा प्रदेश में किसानों पर 60 करोड़ रुपये से अधिक का फसल कर्ज सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह खेती के भविष्य पर बड़ा सवाल है। यदि समय रहते सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गहरा सकता है।

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