दिल्ली बॉर्डर के 9 टोल प्लाज़ा

सार — क्या हुआ और क्यों महत्वपूर्ण है

दिल्ली में बढ़ते वायु-प्रदूषण और बॉर्डर पर जाम की बढ़ी हुई समस्याओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की सीमाओं पर स्थित 9 टोल प्लाज़ा को अस्थायी रूप से बंद करने या स्थानांतरित करने पर विचार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने नगर निगम (MCD) और NHAI को कहा है कि वे एक सप्ताह के भीतर निर्णय करें कि इन 9 टोलों को अस्थायी तौर पर बंद किया जाए या नहीं — मकसद त्वरित यातायात बहाव और प्रदूषण में कमी लाना है।


कौन-सा फैसला लिया गया?

  • सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुझाव दिया कि शहरी प्रवेश-बिंदुओं पर बनने वाली लंबी गाड़ियाँ और जाम वायु गुणवत्ता को अत्यधिक प्रभावित कर रही हैं, इसलिए नौ टोलों को अस्थायी रूप से बंद/स्थानांतरित करने पर विचार किया जाए। कोर्ट ने MCD को यह निर्णय रिकॉर्ड पर रखने के लिए एक हफ्ते की समयसीमा दी।

उन 9 टोल प्लाज़ाओं के नाम

सरकारी आधिकारिक सूचि का सार्वजनिक विवरण समाचार र प्रेस नोट में अलग-अलग है, पर MCD के बॉर्डर-टोल सूची और स्थानीय रिपोर्टों के आधार पर जिन बॉर्डर-बुथ का बार-बार जिक्र आता है उनमें प्रमुख नाम ये हैं:
Kapashera (कपासहरा), Ayanagar (आयानगर), Old Bijwasan / Old Brijwasan (पुराना बिजवासन), New Bijwasan / New Brijwasan (नया बिजवासन), Palam Vihar (पलम विहार), Bajghera (बाज़घेरा), Jhatikhera (झाटीखेरा), Nanakheri (नानकहेड़ी), Mandi More (मंडी मोड़)। यह सूची MCD के बॉर्डर-टोल दस्तावेजों/लोकल लिस्टों में पायी जाती है। हालाँकि कोर्ट ने सिर्फ संख्या (9) और बंद/स्थानांतरण का निर्देश दिया है — आधिकारिक फाइनल नाम और सूची MCD की आधिकारिक रिपोर्ट में दर्ज होगी।


— नोट: सूची पर आधिकारिक पुष्टि जरूरी है

उपरोक्त नाम स्थानीय और सरकारी दस्तावेजों/लिस्टों के आधार पर बताए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश नीतिगत और अस्थायी कदम के रूप में आया है — औपचारिक आदेश/लिस्ट MCD की रिपोर्ट में दर्ज करके जारी की जाएगी। इसलिए अंतिम पुष्टि के लिए MCD/एनएचएआई की आधिकारिक विज्ञप्ति देखें।


क्यों टोल बंद/स्थानांतरित करने की मांग हुई?,

  1. ट्रैफिक-जैम और स्टैंडस्टिल वाहनों से उत्सर्जन बढ़ना: बॉर्डर-टोल पर वाहनों का लंबा इंतज़ार और धीमी गति से चलना प्रदूषण के मुख्य कारणों में से एक माना जाता है। कोर्ट ने कहा कि यह हर सर्दियों में गम्भीर समस्या बन जाती है।
  2. आकृतिक त्वरित राहत: स्कूल-ऑफिस बंद जैसे कदमों के साथ, टोल बंद करना एक तात्कालिक राहत के रूप में देखा जा रहा है जिससे AQI पर जल्दी असर पड़ सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्थायी योजना के साथ तात्कालिक उपाय भी जरूरी हैं।
  3. लॉन्ग टर्म टेक्नोलॉजी शिफ्ट: केंद्र सरकार और राजमार्ग मंत्रालय ने भी मल्टि-लेन फ्री-फ्लो (MLFF) और स्मार्ट सिस्टम पर काम तेज़ करने की नीतियाँ बताई हैं — यानी भविष्य में वाहनों को रुकना नहीं पड़ेगा। पर वह समाधान अभी पूरी तरह लागू नहीं है; इसलिए अस्थायी बंद पर चर्चा हुई।

बंद करने से किसे-किसे असर पड़ेगा?

कम असर नहीं — संभावित लाभ

  • यातायात में तरलता: बॉर्डर पर लंबी कतारें घटने से आवाज-प्रदूषण और वाहन-उत्सर्जन में कमी आएगी। यह शहर के अंदर AQI पर तुरंत कुछ हद तक सकारात्मक असर दे सकता है।

लेकिन नुकसान और चुनौतियाँ भी हैं

  • राजस्व और रोज़गार पर असर: MCD और जिन एजेंसियों को टोल कलेक्शन का ठेका मिला है, उन्हें राजस्व घाटा हो सकता है; साथ ही टोल बूथ पर काम करने वाले कर्मचारियों की आय प्रभावित होगी। कोर्ट ने इस आर्थिक प्रभाव को भी ध्यान में रखने को कहा और प्रभावित श्रमिकों के सत्यापन व मुआवज़े पर भी निर्देश दिए।
  • रूट-मैनेजमेंट और वैकल्पिक व्यवस्था: टोल बंद होने पर वाहन किस मार्ग से होंगे, किस तरह निगरानी/सुरक्षा सुनिश्चित होगी — इन लॉजिस्टिक चुनौतियों का समाधान करना पड़ेगा। NHAI/MCD को यह प्लान बनाना होग

क्या यह अस्थायी है या स्थायी?

सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी बंद/स्थानांतरण पर विचार करने का निर्देश दिया है — कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि वे शीतकालीन ऊँची-प्रदूषण अवधि (Oct–Jan) में तीन-चार महीने के लिए बंद करने की बात भी कर रहे थे। पर अंतिम समयावधि और स्थायित्व के निर्णय का जिम्मा MCD/NHAI पर छोड़ा गया है और वे कोर्ट के सामने अपने प्रस्ताव रखेंगे।


आगे क्या होगा — एक कार्ययोजना

  1. MCD की रिपोर्ट: MCD को एक सप्ताह में कोर्ट में बताना होगा कि कौन-से टोल अस्थायी बंद किए जाएँ और कैसे कर्मचारियों/ठेकेदारों को संभाला जाएगा।
  2. NHAI और स्थानीय प्रशासन से समन्वय: कुछ टोल NHAI के भी हो सकते हैं — इसलिए स्थानांतरण/रूटिंग पर NHAI को भी साथ लेकर चलना होगा।
  3. तुरंत राहत + दीर्घकालिक तकनीक: MLFF और ANPR/ऑटोमेटिक सिस्टम को तेज़ी से लागू करना ताकि भविष्य में टोल बिंदु वाहन-अवरोध का कारण न बनें। परिवहन मंत्रालय ने 2026 के अंत तक barrier-free सिस्टम की बात कही है।

— निष्कर्ष (संक्षेप में)

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